पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि; विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने मुंबई में आयोजित AI4Agri 2026 शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत का आगामी कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित होगी।
भारत के लिए कृषि में AI क्यों महत्वपूर्ण है?
- भारतीय कृषि संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है, जैसे बिखरी हुई भूमि, जलवायु परिवर्तनशीलता, मूल्य अस्थिरता और कम उत्पादकता।
- जलवायु परिवर्तन ने चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ा दी है, जिससे पूर्वानुमान तकनीकों की आवश्यकता बढ़ गई है।
- छोटे और सीमांत किसान (कुल किसानों का 85% से अधिक) सस्ती, डेटा-आधारित परामर्श प्रणालियों की मांग करते हैं।
- राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने के लिए कुशल जोखिम प्रबंधन और बाज़ार तक पहुँच आवश्यक है।
कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका
- मृदा स्वास्थ्य निदान: AI गहन शिक्षण और छवि पहचान का उपयोग करके उपग्रह चित्रों, ड्रोन-आधारित अवलोकनों एवं खेत-स्तरीय छवियों से संकेतों का विश्लेषण कर मृदा स्वास्थ्य की निगरानी करता है।
- कृषि यंत्रीकरण दक्षता: मशीन लर्निंग, ड्रोन अनुप्रयोग और रिमोट सेंसिंग जैसी AI तकनीकें खेती की दक्षता में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
- उद्यानिकी में, जहाँ फसलों को अनेक वृद्धि चरणों में निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित प्रणालियाँ उच्च-मूल्य वाली फसलों की चौबीसों घंटे निगरानी प्रदान करती हैं।
- किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति: AI-आधारित पूर्वानुमान विश्लेषण e-NAM, AGMARKET, कृषि जनगणना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम जैसे प्लेटफ़ॉर्मों से बड़े डेटा का उपयोग कर मूल्य प्रवृत्तियों, आगमन प्रवृतियों एवं क्षेत्रीय मांग का आकलन करता है।
- जलवायु-स्मार्ट कृषि: AI मौसम पैटर्न का पूर्वानुमान कर सकता है और चरम मौसम घटनाओं के लिए समयपूर्व चेतावनी प्रदान कर सकता है।
- WINDS (मौसम सूचना और नेटवर्क डेटा सिस्टम) जैसे प्लेटफ़ॉर्मों के साथ एकीकरण जोखिम आकलन को सुदृढ़ करता है।
AI-संचालित कृषि में सरकारी पहल
- किसान ई-मित्र (2023): एक वॉइस-इनेबल्ड, AI-संचालित चैटबॉट जो PM किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं पर किसानों के प्रश्नों का उत्तर देता है।
- यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और प्रतिदिन 8,000 से अधिक प्रश्नों का समाधान करता है।
- राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS, 2024): AI और मशीन लर्निंग का उपयोग कर कीट संक्रमण और फसल रोगों का समयपूर्व पता लगाती है।
- भारत-विस्तार (Union Budget 2026-27): एक बहुभाषी AI उपकरण जो AgriStack पोर्टल और ICAR पैकेज को AI प्रणालियों के साथ एकीकृत करता है।
- एग्रीस्टैक: डिजिटल कृषि मिशन का मुख्य घटक, जो किसानों को एक अद्वितीय डिजिटल पहचान (Farmer ID) प्रदान करता है।
- ICAR पैकेज: वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित खेती और फसल प्रबंधन परामर्श।
- AI-सक्षम फसल बीमा:
- CROPIC: मोबाइल ऐप्स के माध्यम से अपलोड की गई जियो-टैग्ड, समय-चिह्नित छवियों का उपयोग कर फसल क्षति आकलन में पारदर्शिता बढ़ाता है।
- YES-TECH: रिमोट सेंसिंग और AI विश्लेषण का उपयोग कर वैज्ञानिक उपज अनुमान प्रदान करता है।
- KDSS (कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली): विभिन्न स्रोतों से डेटा एकीकृत कर डिजिटल फसल मानचित्र, मृदा मानचित्र, उपज अनुमान और सूखा/बाढ़ निगरानी जैसी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करता है।

भारतीय कृषि में AI अपनाने की चुनौतियाँ
- ग्रामीण कनेक्टिविटी की कमी: छोटे और सीमांत किसानों के पास प्रायः स्मार्टफोन, IoT उपकरण या डिजिटल अवसंरचना तक पहुँच नहीं होती।
- विद्युत आपूर्ति व्यवधान: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमितता AI उपकरणों के उपयोग को सीमित करती है।
- डेटा गोपनीयता: एग्रीस्टैक जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर भूमि अभिलेख, फसल पैटर्न, वित्तीय विवरण और उपज डेटा का उपयोग होता है। किसान-केंद्रित डेटा स्वामित्व ढाँचे की अनुपस्थिति दुरुपयोग का जोखिम पैदा करती है।
- उन्नत तकनीकों की उच्च लागत: ड्रोन, AI-आधारित सेंसर, रोबोटिक्स और स्वचालित मशीनरी जैसी सटीक कृषि तकनीकें महंगी होती हैं। छोटे भूखंड (औसत ~1–1.2 हेक्टेयर) पैमाने की अर्थव्यवस्था को सीमित करते हैं।
आगे की राह
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय कृषि को जोखिम-प्रधान आजीविका से डेटा-आधारित, लचीला और लाभकारी उद्यम में बदलने की क्षमता रखती है। यदि समावेशी नीतियों, सुदृढ़ अवसंरचना और किसान-केंद्रित क्रियान्वयन द्वारा समर्थित किया जाए, तो AI एक नई कृषि क्रांति ला सकता है, जो प्रभाव में हरित क्रांति के तुल्य होगी—इस बार बीज एवं उर्वरक नहीं, बल्कि डेटा और बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित।
Source: PIB
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